An easy process of giving tarpan to pitras as suggested by Rajesh Mishra Kan for all the readers. It can be used all the time so one can copy it and keep it in one's record.
पिता को जलांजलि
सर्वप्रथम
स्नान करके दक्षिण दिशा की ओर मुख करके, जल
में दूध,
तिल
और अक्षत/जौ मिलाकर तीन बार पिता को जलांजलि दें। जल देते समय ध्यान करें कि वसु
रूप में मेरे पिता जल ग्रहण करके तृप्त हों।
अपने
गोत्र का नाम लेकर बोलें,…… गोत्रे
अस्मतपिता ….(पिता …__ का
नाम) सपत्नीको वसुरूपस्तृप्यताम् इदं सतिलं जलं तस्मै स्वधा नमः,
तस्मै
स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः ।
दादा दादी को जल
देने के लिए मंत्र
अपने
गोत्र का नाम लेकर बोलें, गोत्रे अस्मत्पितामह: ….(पितामह का
नाम) सपत्नीकोरुद्ररूपस्तृप्यताम् इदं
सतिलं जलं तस्मै स्वधा नमः,
तस्मै
स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः
प्रपितामह /परदादा को जल देने का मंत्र -
अमुक
गोत्र:अस्मत्प्रपितामह: …(परदादा का नाम) सपत्नीको आदित्यरुपस्तृप्यताम् इदं सतिलं जलं तस्मै स्वधा नम:
। तस्मै स्वधा नम:, ! तस्मै
स्वधा नम:!
नाना नानी के लिए
अमुकगोत्रा
अस्मन्मातामह: (नाना का नाम) वसुरूपस्य तृप्यताम् इदं सतिलं जलं तस्मै स्वधा नमः
तस्मै स्वधा नम:, तस्मै स्वधा नम:
प्रनाना के लिए
अमुकगोत्रा अस्मत्प्रमातामह: (प्रनाना का नाम)
सप्तनीको रुद्ररूपस्य तृप्यताम् इदं सतिलं तलं तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नम:
तस्मै स्वधा नम:।।
वृद्धप्रनाना
अमुकगोत्रा
अस्मत्वृद्धप्रमातामह: (वृद्ध प्रनाना का नाम) सपत्नीको आदित्यरूपस्य तृप्यताम्
इदं सतिलं जलं तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नम: तस्मै स्वधा नम:
Note: मंत्र
में सपत्नीको शब्द का उच्चारण नही करना है = पत्नी सहित की सिर्फ भावना करनी है,
।
यह
नित्य तर्पण की अतिलघु विधि है।
जिस
दिन तिथि हो उस दिन विस्तार से अवश्य करना चाहिए।
जिनका
नाम ज्ञात न हो उनके लिए अज्ञात नाम संबोधन करना उचित है।
जय
जय सीताराम!
सादर
राजेश मिश्र 'कण'
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